ऐक्यं बलं समाजस्य तदभावे स दुर्बल: तस्मात ऐक्यं प्रशंसन्ति दॄढं राष्ट्र हितैषिण:
एकता समाजका बल है , एकताहीन समाज दुर्बल है| इसलिए , राष्ट्रहित सोचनेवाले एकता को बढावा देते है |
Tuesday, March 1, 2011
knowledge is best friend
सामाजिक नेटवर्किंग का उद्देश्य है
ज्ञान और अनुभवों को साझा
No comments:
Post a Comment