विशेष - हम न तो किसी दल के सदस्य हैं और न ही किसी संगठन के,, जो भी विचार हैं वो हमारे अपने हैं !
कौटिल्य नीति के अनुसार अच्छा राजा वो है जो आक्रमण करता है और वो भी है जो जो पराजय को सामने देखकर पीछे हट ता है जिससे पुनः शक्ति एकत्र कर के अन्याय के खिलाफ युद्ध कर सके ! राजनीति के कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण सीख पराजय से ही मिलती है - १. विनम्रता २. शत्रु के प्रति सम्मान
३. युद्ध नीति का पुनः निरीक्षण और कमियों को दूर कर नई योजना को तैयार करना ४. अपने असल शत्रु और मित्र की पहचान !
हमारी नीति के अनुसार - विश्व का हर अच्छा शिकारी आखेट करने से पहले एक कदम पीछे हटता है - उदहारण स्वरुप १. धनुष की प्रत्यंचा २. सर्प ३. सिंह ४. काँटा इत्यादी, ये हमें प्रकृति ही सिखाती है !
अतः बाबा रामदेव जी का ४ जून को राम लीला मैदान से हटना अत्यंत आवश्यक था क्योंकि वर्तमान में वही एक व्यक्ति हैं जो हमारे भारत को इन वैश्विक कंपनियों और भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाने में सहायक हो सकते हैं, और बाबा रामदेव अपने अहंकार के लिए नहीं लड़ रहें हैं बल्कि भारतीय जनता की भलाई के लिए लड़ रहें हैं !
हमारा प्रश्न : हमारे सामने अब कोई विकल्प नहीं है किसी भी राजनैतिक दल के रूप में, इसका क्या समाधान हो सकता है ?
बाबा रामदेव या अन्ना हजारे के विरोध में बोलने वाले बगुला भगत लोगों से सावधान रहें क्योंकि इनको देश और समाज को तोड़ने में महारथ हासिल है और कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी अगर इनके विरोध में इनका स्वार्थ जुड़ा हो क्योंकि हर घूसखोर इस समय इनका विरोध कर रहा है !
कौटिल्य नीति के अनुसार अच्छा राजा वो है जो आक्रमण करता है और वो भी है जो जो पराजय को सामने देखकर पीछे हट ता है जिससे पुनः शक्ति एकत्र कर के अन्याय के खिलाफ युद्ध कर सके ! राजनीति के कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण सीख पराजय से ही मिलती है - १. विनम्रता २. शत्रु के प्रति सम्मान
३. युद्ध नीति का पुनः निरीक्षण और कमियों को दूर कर नई योजना को तैयार करना ४. अपने असल शत्रु और मित्र की पहचान !
हमारी नीति के अनुसार - विश्व का हर अच्छा शिकारी आखेट करने से पहले एक कदम पीछे हटता है - उदहारण स्वरुप १. धनुष की प्रत्यंचा २. सर्प ३. सिंह ४. काँटा इत्यादी, ये हमें प्रकृति ही सिखाती है !
अतः बाबा रामदेव जी का ४ जून को राम लीला मैदान से हटना अत्यंत आवश्यक था क्योंकि वर्तमान में वही एक व्यक्ति हैं जो हमारे भारत को इन वैश्विक कंपनियों और भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाने में सहायक हो सकते हैं, और बाबा रामदेव अपने अहंकार के लिए नहीं लड़ रहें हैं बल्कि भारतीय जनता की भलाई के लिए लड़ रहें हैं !
हमारा प्रश्न : हमारे सामने अब कोई विकल्प नहीं है किसी भी राजनैतिक दल के रूप में, इसका क्या समाधान हो सकता है ?
बाबा रामदेव या अन्ना हजारे के विरोध में बोलने वाले बगुला भगत लोगों से सावधान रहें क्योंकि इनको देश और समाज को तोड़ने में महारथ हासिल है और कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी अगर इनके विरोध में इनका स्वार्थ जुड़ा हो क्योंकि हर घूसखोर इस समय इनका विरोध कर रहा है !

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