Monday, June 27, 2011

क्या कोई बता सकता है कोई विकल्प या कोई रास्ता इस दलदल से बाहर निकलने का ,बाबा रामदेव ने घोषणा कर दी - राजनैतिक दल नहीं बनायेंगे ! अन्ना हजारे से ऐसे कोई उम्मीद रखना बेकार है - वो लोकपाल बिल पर ही समर्पित हैं और वो भी इस दिशा में नहीं सोचते ! एक नैतिक मूल्यों के आधार वाला कोई राजनैतिक दल है नहीं इस समय देश में, जाति, धर्म और परिवार पूजक दल ही है इस समय देश में, गुंडों को खुली छूट है चुनाव लड़ने की और उनकी ताकत और पैसे के आगे एक आम आदमी सोच भी नहीं सकता चुनाव लड़ने के विषय में, आज हालत ये है कि हर असफल आदमी नेतागिरी को ही चुन लेता है और जो घर को दिशा नहीं दे पाए वो देश को दिशा देने के लिए आगे आ जाते हैं. हमारे पास क्या विकल्प शेष रह गया है केवल अपना और देश का शोषण करवाने के बजाय. क्या कोई गारंटी है कि अगले चुनाव में जो भी पार्टी आएगी वो देश हित में काम करेगी और भ्रष्टाचार को लगभग ख़त्म कर देगी जो समाज की सबसे प्राथमिक इकाई परिवार और विद्यालयों तक में घुस चुका है

बाबा रामदेव ने घोषणा कर दी - राजनैतिक दल नहीं बनायेंगे ! अन्ना हजारे से ऐसे कोई उम्मीद रखना बेकार है - वो लोकपाल बिल पर ही समर्पित हैं और वो भी इस दिशा में नहीं सोचते ! एक नैतिक मूल्यों के आधार वाला कोई राजनैतिक दल है नहीं इस समय देश में, जाति, धर्म और परिवार पूजक दल ही है इस समय देश में, गुंडों को खुली छूट है चुनाव लड़ने की और उनकी ताकत और पैसे के आगे एक आम आदमी सोच भी नहीं सकता चुनाव लड़ने के विषय में, आज हालत ये है कि हर असफल आदमी नेतागिरी को ही चुन लेता है और जो घर को दिशा नहीं दे पाए वो देश को दिशा देने के लिए आगे आ जाते हैं.  हमारे पास क्या विकल्प शेष रह गया है केवल अपना और देश का शोषण करवाने के बजाय. क्या कोई गारंटी है कि अगले चुनाव में जो भी पार्टी आएगी वो देश हित में काम करेगी और भ्रष्टाचार को लगभग ख़त्म कर देगी जो समाज की सबसे प्राथमिक इकाई परिवार और विद्यालयों तक में घुस चुका है

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